सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

मनुष्यता..🍁

मनुष्य का मरना नही है उतना भयावह
जितना हौसलों का मरना
विश्व पटल पर 
मैं तौलता हूँ राजनेताओं को
उनकी इस काबिलियत से
कि किसने दी है
वंचितों के हौसलों को उड़ान
और किसने दफ्न किया है
उनके भ्रूण रूपी स्वप्न को
किसने बनाई हैं संभावनायें
और कौन है मानवता को
निगलने की फिराक में
ये वो पैमाना है
जो मुझे काबिल बनाता है
लोगों को और राजनीति को 
तुलनात्मक नजरिये से परखने में
इन प्रक्रियाओं के विश्लेषण में
मुझे सिद्धान्तों की आवश्यकता नही होती
और मैं मनुष्यता को धारण करता हूँ..।

                                         - अंकेश वर्मा

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

घर मे घर..🍁

कभी बँटवारे  तो कभी घर के  भीतरी दीवारों का द्वन्द कभी अपनी अवहेलना तो कभी पिता की तानाशाही से कभी माँ के साथ को अथवा बहन के भीगे नयनों से या अपनी सत्ता स्थापित करने को कई बार खुद से भी बिगड़ते हैं रिश्ते बच्चे जब बड़े हो जाते है घर मे कई घर हो जाते हैं..!                    - अंकेश वर्मा 

क्षणिकाएं...🍁

गनीमत है कि दिन के हर पहर मुझसे अलग-अलग बर्ताव करते हैं... जैसे पक्षी लौट आते हैं अपने बसेरों पर शाम के ढलते ही तुम भी वापस आ जाती हो मेरे ख्वाबों में मेरी शर्तों के साथ.. उजाले कभी भी मेरे साथी नही रहे यही कारण है कि चांदना के पहर से ही तुम मुझसे दूर होने लगती हो... © अंकेश वर्मा

विफलता २

 कुछ पुण्य न अर्जित किया  कुछ साध्य साधन चुक गए कुछ सुरम्य दिन भी  दीपक किनारे छिप गए देखता हूँ वक्त बीते  मैं कहाँ था सोचता हो जीव कोई मैं उसे गिद्धों समान नोचता स्वयं, स्वयं को देखकर भ्रमित हो जाता हूँ रत्न सारे हारता हूँ...२ x